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शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

e i pi

यह पोस्ट अभिषेक ओझा जी की पोस्ट "एक ख़ूबसूरत समीकरण" के सन्दर्भ में लिख रही हूँ - यह पोस्ट देखने के लिए यह लिंक क्लिक करें |

यह इ, आई पाई आखिर है क्या बला ? यहाँ साधारण भाषा में समझाने की कोशिश करती हूँ | पहले पाई की बात करूंगी, फिर आई की, फिर इ की ; फिर घात (पावर) की और आखिर में इन सब के आपसी सम्बन्ध की |
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( I )
तो पहले पाई समझते हैं -- सोचिये की एक घडी है और एक छड़ी को धुरी से ३ बजे की और रखिये - यह कोण है ० डिग्री (साथ में दी हुई फिगर देखें -->| अब यह छड़ी घडी से उलटी दिशा में घूमेगी (अर्थात ३ से २, १, १२ .... फिर ९ फिर ६ और पूरा चक्र घूम कर फिर ३ बजे पर) और कोण बढ़ता जाएगा (यदि घडी की ही दिशा में घूमे तो कोण निगेटिव होगा - इसमें कोई राज़ की बात नहीं है - जब हम जोमेट्री पढ़ते हैं तो सीढ़ी रेखा के ऊपर के कोण + और नीचे के कोण - मानते हैं , इतना ही कारण है ) पूरा घूम आने के बाद का कोण फिर से ० डिग्री है - और ३६० डिग्री भी |
जिस तरह हम तापमान को डिग्री सेंटीग्रेड में भी पढ़ते हैं (जैसे - पानी १०० डिग्री सेंटीग्रेड पर उबलता है ) और फेरान्हाईट में भी (उसे १०० डिग्री फेरान्हाईट बुखार है ) उसी तरह कोण को डिग्री में भी नापा जाता है और रेडियन में भी | पूरा गोला घूम कर कोण ३६० डिग्री या २ पाई रेडियन होता है | अलग अलग कोणों के लिए यह चित्र देखें। 


पाई (रेडियन में नापा जाने वाला कोण) होता है, गोले की परिधि और व्यास का अनुपात ( pi = circumference / diameter) , और इसका गणितीय मूल्य है करीब करीब २२/७ = ३.१४
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( II )यह तो हुई बात पाई की - अब आते है आई पर - आई क्या है ?

अब थोडा सा बुनियादी गणित याद कर लेते हैं - संख्याएं होती हैं कई प्रकार की -
*** नेचरल नम्बर्स (१,२,३,४ ...) ;;
*******होल नम्बर्स ( ०,१,२,३,४,....)
***इन्टीजर्स (० से + की तरफ भी १,२,३,४ .... और - की तरफ भे -१,-२,-३,-४ ....) ;;
******* रैशनल नम्बर्स ( = p/q जहां p और q दोनों इन्टीजर्स हों और q शून्य न हो) ;;
***इर्रेशनल नम्बर्स ( जो इस तरह न दिखाए जा सकें जैसे की ५ का वर्गमूल );;
******* रियल नम्बर्स (रैशनल और इर्रेशनल दोनों के समूह मिला कर रियल का समूह बनता है) |

अब आते हैं इमेजिनरी नम्बर्स पर - जो आई (i) के रूप में होते हैं |

याद करें की जब एक संख्या को खुद से गुणा किया जाए तो उसका वर्ग ( square ) बनता है | जैसे २ का वर्ग है दो दुनी चार , ३ का वर्ग है तीन तिया नौ ; ४ का वर्ग है चार चौक सोलह आदि | इसका उल्टा होता है वर्गमूल ( squareroot ) जैसे चार का वर्गमूल है दो ; पच्चीस का वर्गमूल पांच है |

सोचिये की आप दो को दो से गुणा करें - तो क्या मिलेगा ? चार मिलेगा न? और यदि (-२) को (-२) से गुणा करें तो ? मज़े की बात यह है की अब भी चार ही मिलेगा, क्योंकि जब हम वर्ग करते हैं तो - चिन्ह खो जाता है |

इसका अर्थ यह हुआ की ४ का वर्गमूल २ भी है और -२ भी है | अर्थात हम सिर्फ + संख्याओं के वर्गमूल निकाल रहे हैं |

और - चिन्ह वाली संख्याओं का क्या ? इसके लिए माना गया कि कोई ऐसी संख्या है जिसका वर्ग -१ है | अब क्योंकि हम जानते हैं की किसी असल संख्या का वर्ग तो -१ हो ही नहीं सकता , इसका अर्थ तो यह हुआ न की हमने जिस संख्या का वर्ग -१ को माना वह एक असल संख्या नहीं है, वह एक कल्पित संख्या है | और कल्पना को इंग्लिश में imagination कहते हैं | तो इस कल्पित संख्या का नाम हुआ - इमेजिनरी अर्थात imaginary जिसके पहली अक्षर i को हमने प्रयुक्त किया -१ के वर्गमूल के लिए | बस इतनी ही होती है "i " और कुछ नहीं |

तो हमें यदि १०० का वर्गमूल चाहिए तो तो कोई समस्या नहीं है ; १० x १० = १०० तो सौ का वर्गमूल तो दस है ही | लेकिन यदि हमें [-१००] का वर्गमूल चाहिए तो हम लिखेंगे
[-१००] = [-१ x १००] जिसका वर्गमूल होगा [ i x १० ] = १० i . बस इतना ही राज है i का !!!

तो आई है [-१ का वर्गमूल] --> एक कल्पित (इमेजिनरी संख्या - i FOR FIRST LETTER OF IMAGINARY )
{और जब रियल संख्या और इमाजिनरी संख्या का जोड़ हो, तो काम्प्लेक्स संख्या बनती है जैसे २+३i }

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( III )
अब बढ़ते हैं e ( इ ) की ओर | यह अक्षर है एक्सपोनेंशियल (exponential ) का पहला अक्षर।  यह आपने सुना होगा रेडियो धर्मिता के सन्दर्भ में | जब युरेनियम या रेडियम जैसे रेडियो धर्मी पदार्थ किसी भी मात्रा में रखे जाते हैं (नेचरल कंडीशंस में) तो वे खुद ही क्षय (decay ) होते हैं | जितनी भी मात्रा हो, एक निश्चित अवधि के बाद उसकी आधी रह जाती है - इस अवधि को "हाफ लाइफ" कहते हैं| उदाहरण के लिए यदि एक घंटे में पदार्थ २०० से १०० किलो हुआ; तो फिर एक घंटे में वह १०० से ५०; अगले घंटे में ५० से २५ आदि होगा | यह एक घंटे का समय उस पदार्थ की हाफ लाइफ है | इस तरह के क्षय को एक्सपोनेंशियल डीके ( exponential decay ) कहते हैं |

इस exponential पहला अक्षर e इस्तेमाल होता है इस तरह के क्षय (वैसे बढ़त को भी दर्शाते हैं इससे, घात +  और घात - हो तो क्षय ) को दर्शाने के लिए और गणितीय मूल्य है २.७१८ |{ एक्सपोनेंशियल |}
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( IV )
 अब बात करें घात की - घात को मैं ^ द्वारा लिखूंगी | जब हम किसी संख्या को खुद से गुणा करें तो हमें उसका वर्ग मिलता है | इसी तरह यदि हम किसी संख्या को अपने आप से (किसी और संख्या जितनी बार) गुणा करते हैं तो कहते हैं की पहली संख्या को दूसरी संख्या की "घात " लग रही है - जैसे यदि दो को पांच की घात है अर्थात 2x2x2x2x2 = ३२ (= २ पावर ५ = २^५ ) ; और दो को दस की घात लगे तो होता है १०२४ (= २ पावर १० = २^१०= 2x2x2x2x2x2x2x2x2x2)

सोचिये की e को घात लग रही है १ की तो मिलेगा २.७१८ ; इ को दो की घात अर्थात = २.७१८ x २.७१८ = [=e ^ 2 = ७.३८७] | यदि घात निगेटिव अर्थात ऋणात्मक हो, तो यह गुणा विभाजक में होगा जैसे यदि e को {-२} की घात है तो मिलेगा [e पावर -२ = e^(-२)= [१/ {e^२}] = [१/{२.७१८ x २.७१८} = ०.१३५ |

तो यदि इ (e) को + घात हो तो हमें १ से बड़ी संख्या मिलती है (क्योंकि २.७ के पावर का गुणा हो रहा है), और - घात हो तो १ से छोटी संख्या मिलती है (क्योंकि २.७ के पावर से विभाजन हो रहा है)
यह नीला भाग घात के -  न  तो आगे बढ़ जाए :)

घात ( पावर ) के गणीतिकीय सिद्धांत हैं :-
(१) m ^ n = m x m x m x ....x m (self multiplication n times)
जैसे ३^४ = ३.३.३.३ = ८१

(२) m ^ २ अर्थात m का वर्ग ... उदाहरण के लिए --> ३^२ = ३ x ३ = ९
और
m ^ १/२ का अर्थ है m का वर्गमूल | उदाहरण के लिए --> ९ ^(१/२) = ३

(३) a ^ (b +c) = (a^b) x (a^c)

अर्थात एक संख्या को (दो संख्याओं के जोड़ की घात) लगने का अर्थ है उसे उन दोनों की घात अलग से लगा कर दोनों उत्तरों को आपस में गुणा कर देना | उदाहरण के लिए --> ३ ^ (२+२) = (३^२) x (३^२) = 9x ९ = ८१

(४) a ^ (b -c) = (a^b) / (a^c)

अर्थात एक संख्या को (दो संख्याओं के अंतर की घात) लगने का अर्थ है उसे उन दोनों की घात अलग से लगा कर दोनों उत्तरों का आपस में विभाजन कर देना | उदाहरण के लिए --> ३ ^(४-१) = ८१/३ = २७

(५) a ^ (-b) = 1 / [a ^ b)

इसका मतलब है ऋणात्मक घात अर्थात विभाजक में धनात्मक घात | (रेसिप्रोकल) उदाहरण के लिए --> ४ ^(-२) = १/(४^२) = १/१६

(६) [ { a ^ b } ^c ] = a ^ ( b x c)

अर्थात यदि एक संख्या को एक घात लगाने के बाद फिर दूसरी घात लगे जाए - तो यह ऐसे ही है जैसे की उसे उन दोनों के गुणा की घात लगी हो | उदाहरण के लिए --> (२^३)^४ = २^(३ x ४) = २^१२ = ४०९६

(७) m ^ 0 = १ अर्थात किसी भी संख्या को शून्य ( इन्टीजर) की घात होता है = १ |

यदि इमेजिनरी घात लगे तो क्या होगा????
तब एक्सपोनेंशियल बदलाव तो होगा , किन्तु घात अब किसी रियल नंबर के बजाय इमेजिनरी कोण की है | तो इ अपने आप से गुणा होने के बजाये अब कोण में घूम रहा है - कितने कोण घूमेगा? जितनी कि इमेजिनरी घात लगी हो, उतना ही कोण घूमेगा |

आगे देखते हैं |

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( V ) अब सब साथ में - इ,आई, पाई, घात

अब तक हमंने देखा अलग अलग से पाई, आई, इ, और घात को |

अब हम जानते हैं कि (+1) x(+1) = (+1), aur (-1)x(-1) bhi = +1 एक बार फिर से ऊपर की फिगर के हिस्से देखें अब -->
(A ) हमने देखा की जब काँटा बिलकुल नहीं घूमा है तब कोण है ० डिग्री या ० रेडियन - और तीर की इस शुरूआती स्थति को नंबर लाइन पर {+१} माना जाता है |

(+1) x (+1) = (+1) का अर्थ हुआ कि जब तीर या तो {बिलकुल न घूमे} या फिर {पूरे गोले को दो बार घूम कर लौट आये} - तो फिर से +१ पर ही खड़ा होगा |

इसे गणित की भाषा में कहते हैं कि एक्सपोनेंशियल बदलाव तो हो रहा है, किन्तु घात अब किसी रियल नंबर के बजाय इमेजिनरी कोण की है | तो इ अपने आप से गुणा होने के बजाये अब उतने कोण में घूम रहा है - जितने कोण की घात लगी हो |तो पहली फिगर ऐसी बनती है --> यहाँ या तो बिलकुल घूमा ही नहीं है तीर , या पूरा घूम कर लौट आया है (या तो शून्य या फिर 2pi रेडियन)

(B ) अब सोचिये कि रेखा आधा गोला घूम चुकी है - अर्थात कोण है = १८० डिग्री या = (१ पाई) रेडियन्स (

तो तीर अब ९ बजे की ओर होगा | यहाँ भी एक्सपोनेंशियल बदलाव तो हो रहा है, किन्तु घात अब किसी रियल नंबर के बजाय इमेजिनरी कोण {पाई रेडियन} की है | तो दूसरी फिगर ऐसी बनती है --> (रेखा आधा ही गोला घूमे - तो यदि पिछली बार धुरी से पूर्वकी ओर नोक थी तो अब उलटी अर्थात पश्चिम की ओर होगी)

यदि दो बार (आधा गोला) घूमा जाए तो एक पूरा गोला होगा - अर्थात (-१)X (-१)=+१
यानि 
e^pi x e^pi = e ^ (pi + pi) 
                  = e^(2pi)
=>
(-1)x(-1) = (+1

(C ) तो हमने देखा कि एक गोले का वर्गमूल आधा गोला है (कोण की दृष्टी से, मैं क्षेत्र फल नहीं कोण की बात कर रही हूँ)

इसी तरह आधे गोले का वर्ग मूल है + {एक चौथाई गोला} अर्थात (रेखा एक चौथाई ही गोला घूमे - तो यदि पिछली बार धुरी से पूर्वकी ओर नोक थी तो अब उत्तर की ओर होगी)

यदि दो बार (चौथाई गोला) घूमा जाए तो आधा गोला होगा - अर्थात (i)^२ = {(i )^२}= {-१}

या फिर {-१}^१/२ या -१ का वर्गमूल "i " है

(D ) इसी तरह यदि तीन चौथाई गोला घूमा जाए तो यह फिगर बनेगी | यह कोण है ३ पाई / २ या फिर - पाई |

यदि यह कोण (३ pi /२ ) दो बार घूमा जाए तो भी हम डेढ़ गोला घूम कर -१ पर ही पहुँच जायेंगे अर्थात (-i )^२ = -१
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इस तरह से - जब e को (i x रेडियन्स में कोई कोण) की घात लगती है - तो वह गुणा नहीं होता अपने आप से - वह उतने कोण से घूम जाता है |

***********
e पर २ पाई रेडियन की घात --> पूरा गोला = +१
*** 
e पर १ पाई रेडियन की घात --> आधा गोला = -१ (अर्थात पिछली बार की आधी घात - जो वर्गमूल दर्शाती है - तो +१ का वर्गमूल -१ भी है )
***********
e पर + पाई/२ रेडियन --> एक चौथाई गोला = + i (फिर से पिछली बार से आधी घात - जो फिर से वर्गमूल दर्शाती है - तो -१ का वर्ग मूल i है)
***और -
e पर पाई/२ रेडियन या ३पाइ / २ रेडियन अर्थात तीन चौथाई गोला = -i ;

यही है पाई, आई, इ और उनका सम्बन्ध |
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अब यह सब फिर एक बार देखें, गणित की भाषा में -->
इसे गणित की भाषा में कहेंगे

[e ^ 0 pi] = e ^ 0 = 1(रेखा बिल्कुल ना घूमे )

;; [e ^ 2 pi] = 1 (रेखा एक पूर्ण गोल घूम कर लौट आये )
;; [e ^ 4 pi] = {e ^ 2 pi} ^2 = 1 (रेखा दो पूर्ण गोले घूम कर लौट आये )
;; [e ^ 6 pi] = {e ^ 2 pi} ^ 3 = 1 (रेखातीन पूर्ण गोले घूम कर लौट आये )आदि ;

इन सभी स्थितियों में तीर +१ पर ही रहेगा

(B ) अब सोचिये कि रेखा आधा गोला घूम चुकी है - अर्थात कोण है = १८० डिग्री या =पाई रेडियन्स

तो घडी में तीर अब ९ बजे की ओर होगा | इसे गणित की भाषा में कहेंगे कि एक्सपोनेंशियल बदलाव तो हो रहा है, किन्तु घात अब किसी रियल नंबर के बजाय इमेजिनरी कोण {पाई रेडियन} की है | तो दूसरी फिगर ऐसी बनती है --> (रेखा आधा ही गोला घूमे - तो यदि पिछली बार धुरी से पूर्वकी ओर नोक थी तो अब उलटी अर्थात पश्चिम की ओर होगी)

यदि दो बार (आधा गोला) घूमा जाए तो एक पूरा गोला होगा - अर्थात (-१)X (-१)=+१ या फिर

गणित की भाषा में

(हम पहले देख चुके हैं की १/२ की घात वर्गमूल दिखाती है , और e ^ ( २ pi i ) = +१ होता है )

-१ = वर्गमूल (१)
= {e ^ 2 pi} ^ 1/२

= e ^ (२ pi i x 1/२ )

= e^ (1pi i)

= -1
इसका अर्थ है कि कोण यदि 2pi था तो पूरा गोला घूम कर हम +१ पर पहुंचे थे , अब कोण 1pi है तो हम आधा ही गोला घूम कर -१ पर आये हैं, घात आधी हो गयी है - तो पिछले उत्तर का वर्गमूल मिल गया है |

[e^ (1pi i)] x [e^ (1pi i)] = [e^ (2pi i)] = +1

अर्थात ( कोण आधा गोला ) का वर्ग पूरे गोले का कोण और पूरे गोले का वर्गमूल आधा गोला हुआ |

(C ) तो हमने देखा कि एक गोले का वर्गमूल आधा गोला है (कोण की दृष्टी से, मैं क्षेत्र फल नहीं कोण की बात कर रही हूँ 2pi x १/२ = pi )

इसी तरह आधे गोले का वर्ग मूल है + एक चौथाई गोला अर्थात (रेखा एक चौथाई ही गोला घूमे - तो यदि पिछली बार धुरी से पूर्वकी ओर नोक थी तो अब उत्तर की ओर होगी)

यदि दो बार (चौथाई गोला) घूमा जाए तो आधा गोला होगा - अर्थात (-i)^२ = {(-i )^२}= {-१}

तो गणित में हम लिखेंगे

[e^ (1pi i)] x [e^ (1pi i)] = [e^ (2pi i)] = +१

इसी तरह
e ^ ((1 pi I ) x 1/2 ) = e^ (1pi i/2)
= e ^ (1 pi i x 1/2 )
= वर्गमूल (-१)
= + i

(D ) इसी तरह यदि तीन चौथाई गोला घूमा जाए तो यह फिगर बनेगी | यह कोण है ३ पाई / २ या फिर - पाई |

यदि यह कोण (३ pi /२ ) दो बार घूमा जाए तो भी हम डेढ़ गोला घूम कर -१ पर ही पहुँच जायेंगे अर्थात (-i )^२ भी = -१ होता है

 फिर (-१) का वर्ग मूल - i भी होता है |
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इस तरह से - जब e को (i x रेडियन्स में कोई कोण) की घात लगती है - तो वह गुणा नहीं होता अपने आप से - वह उतने कोण से घूम जाता है |

बस - यही है पाई, आई, इ और उनका सम्बन्ध |