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शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

matter and antimatter 1


पदार्थ और ऊर्जा - यह दो चीज़ें ब्रह्माण्ड का कच्चा पदार्थ हैं | पदार्थ को आप ऊर्जा का ही संग्रहित रूप कह सकते हैं | आमतौर पर ऊर्जा - ऊर्जा में(energy to energy) ,  और पदार्थ - पदार्थ में (matter to matter), बदलते रहते हैं, किन्तु पदार्थ ऊर्जा में या ऊर्जा पदार्थ में बदले - यह आम स्थितयों में देखने नहीं मिलता |

(1) साधारण रासायनिक प्रतिक्रियाओं(chemical reactions) में पदार्थ के मूलतत्व (elements) नहीं बदलते - सिर्फ उनके संयोजन (compounds) बदलते हैं - जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) और हाइड्रो क्लोरिक एसिड (HCl) मिल कर सोडियम क्लोराइड (NaCl) और पानी (H2O) बन जाते हैं - किन्तु मूल तत्त्व जो पहले थे - सोडियम, क्लोरिन, हाइड्रोजन और ओक्सिजन - वही रहते हैं और उतनी ही मात्रा में रहते हैं | इन रासायनिक क्रियाओं में ऊर्जा निकल भी सकती है, और सोखी भी जा सकती है - लेकिन यह सिर्फ रूपांतरण होता है - ऊर्जा ना बन रही होती है, ना ही नष्ट होती है |

(2) न्यूक्लियर अभिक्रिया (nuclear reaction) की ज़रूरी स्थितियां हों - तो पदार्थ (matter) { जो प्रोटोन , नियुट्रोन  और इलेक्ट्रोन से बना है } एलिमेंटल स्तर पर बदल सकता है - जैसे हाइड्रोजन हीलियम में बदल सकती है | इन दोनों (और बाकी सब ही ) मूल तत्वों में प्रोटोन और इलेक्ट्रोन की गिनती अलग अलग होती है | इस तरह के न्युक्लिकीय अभिक्रियाएँ सितारों में चलती ही रहती हैं | जब यह होता है - तो अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा बनती है [ E = m x 9 x 10,000,000,000,000,000 ] अर्थात एक ग्राम पदार्थ से  इतनी ऊर्जा { जुल्स में } बनती है - लेकिन यह जिन स्थितयों में होता है वे हमारी धरती पर आमतौर पर नहीं पायी जातीं | हाँ - वे स्थितयां बनायी जा सकती हैं | न्यूक्लियर पावर प्लांट्स में और न्यूक्लियर बम में यही किया जाता है | 

(3) और एक तरह के पदार्थ बदलाव होते हैं - [पदार्थ और प्रति पदार्थ {matter and antimatter} ] के आपस में बदलने के - लेकिन यह ब्रह्माण्ड (Universe) की शुरुआत से पहले होता है - ब्रह्माण्ड के जीवनकाल में यह नहीं होता , क्योंकि पदार्थ और प्रति पदार्थ एक साथ नहीं रह सकते | फिर - उस समय की परिस्थितियों के हिसाब से या तो पदार्थ ब्रह्माण्ड बन जाता है, या प्रतिपदार्थ ब्रह्माण्ड | दोनों साथ नहीं रह सकते | 

जब [१] पदार्थ पदार्थ में या [२] पदार्थ प्रति पदार्थ में बदले - तब अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है |  यह ऊर्जा आयोनाइज़्ड और नॉन आयोनाइज़्ड विकिरण (electromagnetic rays, radio active rays) के रूप में फटती है - और फैलती चली जाती है | 

मैंने एक ( तीन भागों में ) सिरीज़ में सितारों की संरचना के बारे में लिखा था - एक सितारे की जीवन यात्रा - जिसमे लिखा था कि सितारे कैसे जन्म लेते हैं, युवा और बूढ़े होते हैं - और फिर नष्ट हो कर ब्रह्माण्ड में रिसाइकल होते रहते हैं | किन स्थितियों में वे ब्लेक होल बनते हैं और कब रेड जायंट वगैरह | लिंक है -  एक सितारे की जीवन यात्रा | अब मैं - पदार्थ और प्रति पदार्थ पर सिरीज़ शुरू करने जा रही हूँ, आशा है आपको पसंद आएगी |

लेकिन शुरुआत में यह ज़रूर कहूँगी कि इस पदार्थ ब्रह्माण्ड की रचना और विनष्ट होने के प्रोसिजर को समझा कर धर्म और ईश्वर के नहीं होने की कोई बात मैं नहीं कह रही | ईश्वर इन सब चीज़ों से बहुत परे , बहुत ऊपर हैं | और यदि सूक्ष्मता से वे लिनक्स (जो मैंने दिए हैं) देखेंगे तो पायेंगे , कि ब्लेक होले का घूमना और उसकी धुरी से पदार्थ , का चिन्ह काफी कुछ ब्रह्माण्ड के आधार रूप में श्री महाविष्णु रूप और नाभिकमल पर बैठे ब्रह्म जैसा है | उसी तरह सुपर नोवा एक्स्प्लोज़न का वीडयो बहुत कुछ शिव की तीसरी आँख जैसा लगेगा (दरअसल इस वीडयो का नाम ही है - the eye of god !!! ) 

तो अब यह सिरीज़ शुरू करने जा रही हूँ ... |

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