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मंगलवार, 13 मार्च 2012

जापान का भूकंप -२ :सुनामी की प्रक्रिया , संतोरिणी द्वीप के ज्वालामुखी


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जापान में आये भयंकर भूकंप और सुनामी के प्रकोप को एक साल बीत चुका है । इस के सन्दर्भ में मैंने यह श्रंखला शुरू की है जिसमे पिछले भाग में हमने देखा की भूकंप कैसे आते हैं  । "टेक्टोनिक" प्लेटें एक दूसरे से जुडी होती हैं , और इस जोड़ पर काफी लम्बे अरसे तक अलग दिशा में/ अलग गति से  हिलने के प्रयास करती रहती हैं । किन्तु अत्यंत शक्तिशाली और महाविशालकाय पत्थरों पर अत्यधिक भार है ।(सातों महाद्वीपों और महासागरों के समुद्रतल इन्ही टेक्टोनिक प्लेटों पर "रखे" हुए है, उन सब का भार इन्ही प्लेटों पर टिका है) । इस अत्यधिक भार के कारण फ्रिक्शन बहुत अधिक है । फ्रिक्शन के कारण हिल पाने में असफल होती प्लेटों पर समयावधि में दबाव इतने अधिक बढ़ जाते हैं कि इस फौल्ट लाइन पर जहां भी पत्थर कुछ कमज़ोर पड़ जाएँ , वहां अचानक टूट जटी हैं, और प्लेटें या तो सरक जाती हैं , या एक दुसरे के ऊपर या नीचे खिसक जाती हैं । इसी से भूकंप आते हैं । 
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इस भाग में हम सुनामी के आने की प्रक्रिया , और संतोरिणी द्वीप के भयंकर ज्वालामुखी को जानने का प्रयास करते हैं । माना जाता है कि यहाँ आया भयंकर विस्फोट तब की Atlantis सभ्यता का विनाशक साबित हुआ था । यहाँ आज भी डर है कि किसी दिन बड़ा भूकंप / ज्वालामुखी विस्फोट हुआ , तो यहाँ से उठी सुनामियां अमेरिका के तटीय शहरों का विनाश कर देंगी । लाखों की संख्या में लोग मारे जायेंगे, क्योंकि ये सुनामी की लहरें ध्वनी तरंगों से बहुत तेज़ गति से सिर्फ छः घंटे में ही अमेरिका पहुँच जायेंगी, इसलिए तटीय क्षेत्रों को खाली करने का समय नहीं होगा  ।
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सुनामी (१)सागर तल में आये भूकंप से, (२)या ज्वालामुखी विस्फोट से, (३)या समुद्र के नीचे हुए अत्यधिक शक्तिशाली परमाणु विस्फोट से , (४)या समुद्र में किसी उल्कापिंड के गिरने से, (५)या फिर या समुद्र के किसी तट पर हुए भूस्खलन से (जिससे भूमि का एक बड़ा हिस्सा समुद्र में गिर गया हो ) शुरू हो सकती है । अधिकतर ये भूकंप से शुरू होती हैं, जैसा कि पिछले साल जापान में हुआ था ।

जब भूकंप का फोकस भूभाग के नीचे हो, तो ऊपर के भूतल पर भूचाल आता है, और वहां के भवन आदि गिर जाते हैं । लेकिन यह फोकस यदि समुद्रतल के नीचे हो, तब उसके ऊपर कोई भवन तो होते नहीं, परन्तु पानी की बहुत बड़ी मात्रा कम्पित हो जाती है ( सिर्फ सागर की उस जगह की गहराई जितना ही आयतन नहीं, बल्कि जितना शक्तिशाली भूकंपन हुआ हो, उतने ही फैले हुए क्षेत्र के जल भाग का सागर तल हिल उठता है , और उसके ऊपर का पानी भी ) । इसके अलावा, समुद्र तल में टनों पानी से दबे हुए sedimentary rocks अत्यधिक दबाव से कभी कभी अचानक ही बदल कर metamorphic में बदलते हैं, जिनका आयतन पहले से बहुत ही कम होता है  ।अचानक आयी इस परिमाण के कमी के कारण भी सागर तल में भूचाल आ सकते हैं ।
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अब सोचिये - जैसे हम पानी में कंकर / या बड़े पत्थर फेंकते हैं, तो वहां से उठती तरंगे गोलाकार में सब दिशाओं को बढती हैं । जितना बड़ा पत्थर - उतनी शक्ति शाली तरंगे, क्योंकि पानी की इलास्टिसिटी हलके पत्थर की छोटी सी ऊर्जा को जल्द ही सोख लेती है । ठीक इसी तरह की तरंगे भूकंप से भी उठती हैं, किन्तु फर्क यह है कि ये तरंगे ऊपर से कंकर गिरने से नहीं , बल्कि नीचे से तले के हिलने से आई हैं, तो इन की शक्ति एक छोटे कंकर के गिरने से बहुत अधिक है । (चित्र विकिपीडिया से साभार )
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सागर तल की टेक्टोनिक प्लेट १ 
सागर तल की टेक्टोनिक प्लेट -२ - बढ़ता दबाव 

नीचे पत्थर टूटने से जल का कम्पन, लहर की शुरुआत 
लहरों का दोनों ओर बढ़ना 



अब ये तरंगे सब दिशाओं में गोल आकर में बढती हैं, जैसे किसी झील में फिंके पत्थर से झील की सतह पर उठी  लहरें हों । लेकिन ये लहरें सिर्फ सतही नहीं हैं, बल्कि पानी का पूरा गहरा कॉलम (स्तम्भ) ही कम्पित है । (एक ऊपर तक भरी बाल्टी को तले से हिला कर देखिये, और दूसरी वैसे ही बाल्टी में ऊपर से कंकर फेंक कर देखिये - किस में से ज्यादा पानी गिरता है ?) ये उठती हुई लहरें कहाँ जायेंगी ? जाहिर है सागर के किनारों की ओर । और कितनी शक्ति के साथ किनारे को चोट पहुंचाएंगी ? जितना वह क्षेत्र भूकंपन के फोकस के नज़दीक होगा । 

ये लहरें गहरे समुद्र में बहुत ऊंची नहीं होतीं , बल्कि इनकी ऊंचाई इतनी कम होती है , कि [आपको आश्चर्य होगा,] एक छोटी सी नाव भी इनके ऊपर आसानी से ride कर सकेगी । उस नाव का कुछ नहीं बिगड़ेगा । लेकिन जैसे जैसे ये किनारे के उथले पानी की ओर आती हैं, तो इतनी बड़ी गहराई की पानी की अत्याधिक मात्रा की जितनी ऊर्जा है, वह अब कम गहरे में कम मात्रा को धकेल रही है । किनारे तक आते हुए तरंग दैर्ध्य (wavelength ) कम होती जाती है और ऊंचाई (amplitude ) बढ़ता है) तो किनारे के उथले पानी पर इनकी उग्रता बहुत बढ़ जाती है, और एक tide (ज्वार भाटा ) की तरह पानी ऊंचा हो जाता है , और ये ऊंची लहरें भूभाग में बहुत भीतर तक , बड़ी ऊंची होकर, और बड़े वेग से घुस आती हैं । इसीलिए इन्हें tsunami या tidal waves भी कहा जाता है ।

एक बड़ी परेशानी यह है की लहर के बढ़ने के सिद्धांत के अनुसार, तट पर पहले लहर का निचला भाग पहुँचता है । इसे "drawback " कहते हैं - पानी जैसे तट से दूर खिंच जाता है, और तल काफी दूर तक दिखने लगता है । जो लोग यह नहीं जानते की यह क्यों हुआ, वे कौतूहल के कारण वहीँ खड़े रहते हैं, और जब पीछे से ऊंची लहर आती है, तब किसी को भागने का स्थान / समय नहीं मिलता । सुनामी की मार दोहरी होती है - एक तो इतने वेग से पानी की जो लहर अति है उसकी मार, ऊपर से यह ऊंचा पानी शहरों के शहर काफी समय के लिए डुबा देता है । यह चित्र देखिये (विकिपीडिया से साभार) । 



यूरोप और अफ्रीका के बीच के सागर में "santorini " नाम की जगह है (ग्रीस )। यह जगह न ही सिर्फ fault line पर है , बल्कि यहाँ सक्रिय शक्तिशाली ज्वालामुखी भी हैं । सदियों पहले यहाँ हुए ज्वालामुखी विस्फोटों के तब की सभ्यता को अचानक समाप्त कर देने का जिम्मेदार भी माना जाता है । कई लोग इसे "Atlantis " की सभ्यता का विनाशक मानते हैं, कि इस महान ज्वालामुखी के विस्फोट से पहाड़ जो ऊपर उठा हुआ था, वह धंस गया, और उस खाली caldera में समुद्र का पानी भर गया। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि इसी सुनामी के drawback ने फ़ारो से बच कर भागते इजराइलियों को निकलने का रास्ता दिया, और पीछे करते हुए सैनिक बाद में आती सुनामी में घिर गए । कुछ लोगों का कहना है कि रेड सी का अचानक चौड़ा हो जाना भी इसी भयंकर ज्वालामुखी , या फिर उससे सम्बंधित भूकंप से हुआ । सच क्या है, यह तो कोई नहीं जानता ।

यह तस्वीर (विकिपीडिया से साभार) देखिये इस द्वीप की - ये जो द्वीप के भीतर घुसा हुआ पानी दिख रहा है - यह ज्वालामुखी का भीतरी भाग है - जिसे caldera कहते हैं । यह ऊपर आकाश की ओर तना हुआ पर्वत विस्फोट के बाद land failure होने से धंस गया, और उस नए बने विशाल caldera (ज्वालामुखी के पीछे छूता विराट गड्ढा ) में समुद्र का पानी घुस आया । अलग अलग गहराई पर अलग अलग तरह के पत्थर हैं (लावा से बने igneous पत्थर) । माना जाता है की इस land failure और समुद्र में इतनी अधिक मात्रा में भूमि के गिरने से उठी भयंकर सुनामी ने ही atlantis सभ्यता को नष्ट किया । [परन्तु वैज्ञानिकों का मानना है के यह दोनों तारीखें आपस में मेल नहीं खातीं !] यह एक oval द्वीप था, जो आज से करीब ३६०० साल पहले आये (धरती के इतिहास के  भयानकतम) ज्वालामुखी विस्फोट से ऐसा हो गया जैसा इस तस्वीर में दिखता है । लिन्क   ३  ४ देखिये


   

यहाँ कई ज्वालामुखी आज भी सक्रिय हैं, ऊपर से यह एक टेक्टोनिक फॉल्ट लाइन पर भी है । [ हर वह जगह जहां ज्वालामुखी आयें, आवश्यक नहीं की वह भूकंप का केंद्र भी हो ही ]। किन्तु दुर्भाग्य से यह द्वीप ऐसी जगह है कि दोनों ही प्राकृतिक आपदाएं इसके लिए अनपेक्षित नहीं हैं । अभी भी यहाँ इस तरह के घटनाएं चल ही रही हैं - २६ जनवरी को यहाँ ५.३ स्केल का भूकंप आया । यह लिंक देखिये  । ऊपर से बड़ी परेशानी यह है, कि यदि कोई बड़ा हादसा हो, तो चट्टान का एक बड़ा भाग भूस्खलन हो कर सागर में गिर जाएगा । इस इतनी बड़ी चट्टान के समुद्र में गिरने से जो लहरें उठेंगी, उनकी शुरूआती peak to peak ऊंचाई होगी २ किलोमीटर !!!! ये लहरें १००० किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ेंगी और एक घंटे में अफ्रीका, साढ़े तीन घंटे में इंग्लैंड, और छः घंटे में अमेरिका के पूर्वी तट पर पहुंचेंगी । तब तक ये "छोटी" हो कर करीब ६० मीटर की हो गयी होंगी । (एक एक-मंजिले घर की ऊंचाई करीब ६ मीटर होती है - तो सोचिये - ६० मीटर ऊंची सुनामी !!!) ये बोस्टन आदि शहरों को तबाह कर सकती हैं । यह लिंक देखिये । माना जाता है की ये करीब २५ किलोमीटर तक भूभाग के भीतर घुस सकती हैं । ऐसा डर है कि अमेरिका के बोस्टन आदि (पूर्वी तटीय) शहरों में शायद करोडो लोग इस त्रासदी में हताहत हो जाएँ,  ।

जहां अमेरिकिय महाद्वीप का पूर्वी तट इस santorini से कारण सुनामी के खतरे में रहता है, वहीँ दूसरी तरफ  पश्चिमी तट जापान के साथ दूसरी फौल्ट लाइन पर है, तो सुनामी का खतरा वहां भी बना रहता है ।

अगले भाग में हम ज्वालामुखियों पर बात करेंगे ।

10 टिप्‍पणियां:

  1. भूकंप के बारे में बहुत ही सरल भाषा में अच्छे से समझा दिया आपने ... पढ़ कर रोमांच भी होता है और डर भी लगता है ...

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  2. कमाल की जानकारी है इस लेख में ....
    आभार इंजीनियर शिल्पा !

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  3. Earth Sciences background का होने के कारण मैं समझ सकता हूँ कि आपने इसे रोचकता से तथा सर्वग्राह्य रूप में प्रस्तुत करने हेतु कितना श्रम किया होगा।
    आभार तो बनता है।

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  4. अच्छा जानकारीपूर्ण आलेख.
    आभार.

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  5. जानकारी का आभार। कई बातें या तो कभी पता नहीं थीं या दिमाग की जेब से फिसल चुकी थीं।

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  6. रेत के महल पर पहली बार पाँव रखने की कोशिश की तो यहाँ आपने भूकंप ही ला दिया। :)

    बेहद सहजता से आपने इस प्रक्रिया को समझाया है। अच्छा लगा ये जानकारी से पूर्ण आलेख पढ़कर...

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  7. टिहरी बाँध बनने के दिनों में ऐसे ही टाईम शेड्यूल वाली खबरे आती थी कि आधे घंटे में अलां शहर, एक घंटे में फलां शहर और ढाई घंटे में दिल्ली नेस्तनाबूद हो जायेगी, ये संतोरिणी तो टिहरी का भी खालू है, ये तो इधर मार नहीं करेगा न?
    प्रकृति के सामने हस्ती-ए-आदम कुछ भी नहीं|

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    1. true प्रकृति के सामने हस्ती-ए-आदम कुछ भी नहीं|

      nahi - yah yahaa maar nahi karega - yah europe aur afrika ke beech ke samudr me sthit hai - bhoogol ke hisaab se greece me aata hai |

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