हौले हौले चला तू सखी री
मोरे नंदलाल का पलना
तेज़ हिले तो डर जाएगा
बड़ा नाज़ुक मोरा ललना ....
चंवर धीरे डुला , धाय री
लाल मोरा नन्हा है
नर्म कैसा - रुई के जैसा
मेरा प्यारा कान्हा है
देखो ना जीजी , द्वार पे कोई
शब्द जोर है करता
कहो ना उससे, बोले धीरे
मोरा लाल है डरता |
चंदा तोहे - नैनों में भर लूं
तू कितना- सुन्दर है
सबकी नज़र लग जायेगी तोहे
मोहे लागे बड़ा ही डर है
निंदिया मेरे, पास ना आओ
पलकें मैं ना मूंदूंगी
ललना की आँखों में बस जाओ
मैं बस इसको ताकूंगी ....
ओ जीजी- देखो ना, क्यूं रोता है
नन्द जी का प्यारा लाला
क्या कर लूं मैं, कैसे कर लूं
रुदन ने दिल चीर है डाला ..
तू मत रो, मत रो, मोरे प्यारे
चाँद झुनझुना दूँगी
काहे रोवे है, क्या हुआ है तुझको
सब मैं ठीक मैं कर दूँगी
ना जीजी, स्नान को ना जाऊं
नंदलाल मोरा जागे तो ?
जागने पर मोहे ना देखे और
ये कहीं डर जाए तो .... ?
ओ री सखी , तू बैठ इधर ही
तनिक मैं घृत ले आऊँ,
स्नान का इसके, समय हो चला
इसको मालिश करवाऊं ...
.............सभी को जन्माष्टमी की बधाईयाँ और शुभकामनाएं..............

वात्सल्य से परिपूरित एक भावपूर्ण अर्चन ....आपको भी सपरिवार कृष्णाष्टमी की शुभकामनाएं!
प्रत्युत्तर देंहटाएंआभार - आपको भी सपरिवार शुभकामनायें :)
हटाएंनिंदिया मेरे, पास न आओ
प्रत्युत्तर देंहटाएंमैं पलकें नहीं मूंदूंगी
ललना की आँखों में बस जाओ
मैं बस इसे ताकूंगी ....
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की अनंत शुभकामनाएं !!
आभार - आपको भी :)
हटाएंआपको भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई और शुभकामनाएं..
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रणाम|
प्रणाम जी :) आपको भी बहुत बधाईयाँ युगपुरुष के जन्मा दिन की :)
हटाएंश्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई और शुभकामनाएं.
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपको भी बहुत बधाईयाँ
हटाएंवात्सल्य भाव से पूर्ण बहुत सुंदर कविता...वह कान्हा है ही ऐसा...
प्रत्युत्तर देंहटाएंसच है - वह कान्हा है ही तो ऐसा :)
हटाएंमैया मैं तो चन्द्र खिलौना लैहों ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंसूरदास जी याद आ गये!
इतना बड़ा कॉम्प्लीमेंट ?? आभार आपका :)
हटाएंजन्माष्टमी की शुभकामनायें!
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपको भी बहुत शुभकामनायें
हटाएंइतनी सहज, इतनी मीठी, इतनी ममतामयी कविता!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसचमुच, सूरदास याद आ गए..
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनायें!
Abhar avinash ji. Aap jaise kavi, itna bada compliment. Abhar. Happy janmashtami.
हटाएंआपको भी हार्दिक शुभकामनाएं।
प्रत्युत्तर देंहटाएं............
कितनी बदल रही है हिन्दी !
ओ जीजी- देखो ना, क्यूं रोता है
प्रत्युत्तर देंहटाएंनन्द जी का प्यारा लाला
क्या कर लूं मैं, कैसे कर लूं
रुदन ने दिल चीर है डाला ..
बहुत ही सुन्दर प्यारी सी वात्सल्यमयी प्रस्तुति.
श्रीकृष्णजन्माष्टमी की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.
इतनी सहज, इतनी मीठी, इतनी ममतामयी कविता!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसचमुच, सूरदास याद आ गए..
आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है . लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये
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