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शनिवार, 3 मार्च 2012

हे सूर्यदेव, तुम्हे नमन...

पुनः प्रस्तुति



 हे सूर्यदेव - तुम्हे शत शत नमन |

तुम्हारे शुभागम को नमन
 - तुम्हारे विगम को नमन |

उषा की पूर्वी ललाई को ,
    सांझ की गरिमामई ढलन को नमन 






हजारों गेंदों में लुकते छिपते
        तुम्हारे नटखट बचपन को नमन









आसमानों की हथेलियों पर सजते
रत्नित छल्लों की हर इक किरण को नमन




गृह नक्षत्रों की ओट से फूट उठती
     तुम्हारी उर्मियों की तपन को नमन             
          








किसी धनुर्धर के धनु से उछालें लेती
    शक्तियों की त्वरित तरंगन को नमन



कभी धीर गंभीर शांत - तो कभी ....      
   छितरी बदरी से अठखेली करती
लश्कारे भरी नटखट किरण को नमन








रंग की अनदेखी फहराती चुनरी की ---
अन्तरिक्षी चमन में
अनंत उड़न को नमन ......                                                                                                        















गुलाबी पंखडियों पर सोती ओंस की बूंदों से
स्फटिक किरणों की इन्द्रधनुषी बिखरन को नमन




घुप्प अन्धकार की चादर को चीरती
          तुम्हारी विहंगम भोर की उठन को नमन .........            

हे सूर्यदेव, तुम्हे शत शत नमन, नमन, नमन, नमन....

18 टिप्‍पणियां:

  1. ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, ॐ सूर्याय नमः, ...

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  2. मोह्क तस्वीरें, पवित्र भाव लिये पंक्तियाँ।

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  3. सुन्दर तस्वीरों के साथ सूर्य आराधना में खो ही गये हम तो !

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  4. घुप्प अन्धकार की चादर को चीरती
    तुम्हारी विहंगम भोर की उठन को नमन .........

    हे सूर्यदेव, तुम्हे शत शत नमन, नमन, नमन, नमन....
    ऊऊऊऊऊऊओम

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  5. सूर्य आराधना में पवित्र भाव लिये पंक्तियाँ।

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  6. चित्रमय सार्थक आराधना, आपके भावों का अभिनन्दन!!

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  7. साक्षात देव सूर्य की अनुपम काव्योपासना! शक्ति के इस अजस्र स्रोत को नमन ..हमारे होने के हेतु को नमन!
    कविता ही नहीं यह रश्मि पुंज के अलौकिक अनुष्ठान का आह्वान है !आभार! शिल्पा जी!

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  8. सूर्य की अलौकिक आराधना.....ब्रह्मांडीय परिवार के साथ विज्ञानमय चिंतन के साथ सूर्य के दर्शन..सूर्य की विभिन्न लीलाओं के दर्शन......ब्रह्मांड की तुलना में अपनी क्षुद्रता के दर्शन .....पदार्थ के दर्शन ...ऊर्जा के दर्शन ......दर्शनमय......आनंदमय। सत्यम! शिवम!!सुन्दरम!!!

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  9. सूर्य की अलौकिक आराधना.....ब्रह्मांडीय परिवार के साथ विज्ञानमय चिंतन के साथ सूर्य के दर्शन..सूर्य की विभिन्न लीलाओं के दर्शन......ब्रह्मांड की तुलना में अपनी क्षुद्रता के दर्शन .....पदार्थ के दर्शन ...ऊर्जा के दर्शन ......दर्शनमय......आनंदमय। सत्यम! शिवम!!सुन्दरम!!!

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  10. मोहक!
    जी बिलकुल यही कहना चाहिए।

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  11. स्मार्ट इंडियन जी, संजय जी, वाणी जी - आभार :)
    रश्मि जी, संगीता जी, सुज्ञ भैया - आने के लिए, टिपण्णी के लिए धन्यवाद :)

    अरविन्द सर - कितनी अच्छी बात कही आपने - आभार आपका :)
    कौशलेन्द्र सर - आपने तो सारे पहलू समेट लिए इस टिपण्णी में :)

    अविनाश जी - आभार | ब्लॉग पर आपका स्वागत है :)
    अर्चना जी - आभार :)

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  12. बेहतरीन शब्द सामर्थ्य ...
    मनभावन रचना !

    रंगोत्सव पर आपको शुभकामनायें !

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  13. सुन्दर चित्रों के साथ अनुपम प्रस्तुति,
    अँधेरे मन को प्रकाशित कर दिया.
    आभार.

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