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बुधवार, 30 सितंबर 2026

श्रीराम नामकरण संस्कार | Ramcharitmanas Balkand 196 to 198 |

 https://youtu.be/UP_Ab7sVAXQ


श्रीरामचरितमानस: बालकाण्ड (दोहा 196 से 198)

यहाँ फिर से रामचरितमानस के कुछ दोहों और छंदों को एक मधुर भक्ति गीत के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है। आप इसे यहा सुन सकते हैं:




इस प्रसंग में चारों राजकुमारों—श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जी के नामकरण संस्कार का वर्णन है। गुरु वशिष्ठ जी महाराज दशरथ के चारों पुत्रों के नामकरण का अर्थ बताते हैं:

श्रीराम: जो स्वयं आनंद के सिंधु और सुख की राशि हैं, जिनके एक कण से तीनों लोक सुखी होते हैं और जो संपूर्ण जगत को विश्राम देने वाले हैं। भरत: जो समस्त विश्व का भरण-पोषण करने वाले हैं। शत्रुघ्न: जिनके केवल स्मरण मात्र से शत्रुओं का नाश हो जाता है। लक्ष्मण: जो शुभ लक्षणों के धाम, श्रीराम के परम प्रिय और समस्त जगत के आधार हैं। इसके साथ ही चारों भाइयों का परस्पर प्रेम और माता कौशल्या की गोद में निर्गुण-निराकार परब्रह्म के सगुण बाल रूप का दर्शन वर्णित है। Shrimad Ramcharitmanas: Balkand (Doha 196 to 198) This sacred section highlights the divine naming ceremony (Naamkaran Sanskar) of the four princes: The Naming Ceremony: Sage Vashistha reveals the spiritual significance behind the names of Shri Ram, Bharata, Shatrughna, and Lakshmana. Jo Anand Sindhu Sukh Rasi: Lord Rama as the infinite ocean of bliss who grants peace and liberation to all realms. Brotherly Devotion: The eternal bond between Lakshmana and Shri Ram, and Bharata and Shatrughna. Bhakti & Leela: The all-pervading, formless Brahman playfully resting in the lap of Mother Kaushalya, bound entirely by pure love and devotion. LYRICS (Ramcharitmanas - Balkand - Doha 196 to 198) मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहिं असीस , सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसीदास के ईस . कछुक दिवस बीते एहि भाँती , जात न जानिअ दिन अरु राती . नामकरन कर अवसरु जानी , भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी . करि पूजा भूपति अस भाषा , धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा . इन्ह के नाम अनेक अनूपा , मै नृप कहब स्वमति अनुरूपा . जो आनंद सिंधु सुख रासी , सीकर तें त्रैलोक सुपासी . सो सुख धाम राम अस नामा , अखिल लोक दायक बिश्रामा . बिश्व भरन पोषन कर जोई , ताकर नाम भरत अस होई . जाके सुमिरन तें रिपु नासा , नाम सत्रुहन बेद प्रकासा . लच्छन धाम राम प्रिय , सकल जगत आधार , गुरु बसिष्ठ तेहि राखा , लछिमन नाम उदार . धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी , बेद तत्व नृप तव सुत चारी . मुनि धन जन सरबस सिव प्राना , बाल केलि रस तेहिं सुख माना . बारेहि ते निज हित पति जानी , लछिमन राम चरन रति मानी . भरत सत्रुहन दूनउ भाई , प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई . स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी , निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी . चारिउ सील रूप गुन धामा , तदपि अधिक सुखसागर रामा . हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा , सूचत किरन मनोहर हासा . कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना , मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना . व्यापक ब्रह्म निरंजन , निर्गुन बिगत बिनोद . सो अज प्रेम भगति बस , कौसल्या के गोद .
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रविवार, 27 सितंबर 2026

सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी | Ramcharitmanas Balkand (192-195) | श्रीराम जन्मोत्सव 🕉️

🕉️ श्रीराम जन्मोत्सव 🕉️
 सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी |

श्रीरामचरितमानस: बालकाण्ड (दोहा 192 से 195)


इस संगीतमय प्रस्तुति को यूट्यूब पर यहाँ सुनें :  


यह भी रामचरितमानस की चुनी हुई चौपाइयों, छंदों और दोहों का संगीत मेँ दहला हुआ एक प्रस्तुतीकरण है । इस प्रसंग में प्रभु श्रीराम के दिव्य प्राकट्य और अयोध्या में मनाए गए भव्य जन्मोत्सव का वर्णन है। जब भगवान का जन्म हुआ, तो उनकी बाल ध्वनि सुनकर माताएं और दासियां आनंदित होकर दौड़ीं। महाराज दशरथ को ब्रह्मानंद का अनुभव हुआ, गुरु वशिष्ठ जी ने जातकर्म संस्कार कराए, और अयोध्या में ऐसा अपार आनंद छाया कि सूर्यदेव भी अपने रथ को रोककर एक महीने तक दर्शन करते रहे।



बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार ,
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार .

सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी , संभ्रम चलि आईिं सब रानी .
हरषित जहाँ तहूँ धाईिं दासी , आनंद मगन सकल पुरबासी .

दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना , मानहुँ ब्रह्मानंद समाना .
परम प्रेम मन पुलक सरीरा , चाहत उठनि करत मति धीरा .

जाकर नाम सुनत सुभ होई , मोरें गृह आवा प्रभु सोई .
परमानंद पूरि मन राजा , कहा बोलाइ बजावहु बाजा .

गुरु बसिष्ठ कहूँ गयउ हँकारा , आए द्विजन्ह सहित नृपद्वारा .
अनुपम बालक देखेन्हि जाई , रूप रासि गुन कहि न सिराई .

नंदीमुख सराद्ध करि जातकर्म सब कीन्ह ,
हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहूँ दीन्ह .

ध्वज पताक तोरन पुर छावा , कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा .
सुमनबृष्टि अकास तें होई , ब्रह्मानंद मगन सब लोई .

बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाईिं , सहज सिंगार किएूँ उठि धाईिं .
कनक कलस मंगल भरि थारा , गावत पैठहिं भूप दुआरा .

करि आरति नेवछावरि करहीं , बार बार सिसु चरनन्हि परहीं .
मागध सूत बंदीगन गायक , पावन गुन गावहिं रघुनायक .

सर्बस दान दीन्ह सब काहू , जेहिं पावा राखा नहिं ताहू .
मृगमद चंदन कुंकुम कीचा , मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा .

गृह गृह बाज बधाई सुभ प्रगटे सुषमा कंद ,
हरषित सब जहाँ तहूँ नगर नारि नर बृंद .

कैकेयी सुमित्रा दोऊ , सुंदर सुत जनमत भईिं ओऊ .
वह सुख संपति समय समाजा , कहि न सकइ सारद अहिराजा .

अवधपुरी सोहइ एहि भाँती , प्रभुहि मिलन आई जनु राती .
देखि भानु जनु मन सकुचानी , तदपि बनी संध्या अनुमानी .

अगर धूप बहु जनु अँधिआरी , उड़इ अबीर मनहुँ अरुनारी .
मंदिर मनि समूह जनु तारा , नृप गृह कलस सो इंदु उदारा .

भवन बेदधुनि अति मृदु बानी , जनु खग मुखर समयूँ जनु सानी .
कौतुक देखि पतंग भुलाना , एक मास तेइिं जात न जाना .

मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ ,
रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होई .

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बुधवार, 23 सितंबर 2026

Ramcharitmanas Stuti Song - Balkand 35.191कौशल्या स्तुति 🕉️भए प्रगट कृपाला दीनदयाला | श्री राम जन्मोत्सव स्तुति | रामचरितमानस छंद 🕉️

 Ramcharitmanas Stuti Song - Balkand 35.191
कौशल्या स्तुति 

🕉️भए प्रगट कृपाला दीनदयाला | श्री राम जन्मोत्सव स्तुति | रामचरितमानस छंद 🕉️

श्री रामचरितमानस में अनेक स्तुतियाँ हैं। यह स्तुति भी बालकांड में ही आती है। 


श्री राम जी का बालक रूप में जन्म नहीं हुआ था, वे अपने चतुर्भुज नारायण स्वरूप मेँ माता कौशल्या के सम्मुख प्रकट हुए। कौशल्या जी ने पूर्व जन्मों मेँ नारायण के दर्शनों के लिए तपस्या की थी और उन्हे पुत्र रूप में प्राप्त करने का वरदान मांग लिया था। 
इस अवतार में श्री राम बालक रूप मे प्रकट न होकर अपने चतुर्भुज रूप मेँ कौशल्या जी के आगे प्रकटे, तब कौशल्या माँ ने प्रार्थना की कि आप तो स्तुति योग्य हैं किन्तु मैंने तो पुत्र रूप मेँ मांगा था, कृपया बालक रूप हो जाइए। तब श्री राम एक बालक के रूप मेँ परिवर्तित हुए और बालक की ही तरह रुदन करने लगे। 
यह प्रकरण गोस्वामी तुलसीदास जी ने बहुत सुंदरता से बालकांड मेँ गाया है। 
"भए प्रकट कृपाला" उसी प्रकरण को गीत रूप मे प्रस्तुत करने का प्रयास है । 
यह विडिओ यूट्यूब पर हैं और मानस जी के दोहों और छंदों को ही एक गीत के रूप मेँ ढाला गया है । आशा है आप लोगों को पसंद आएगा । 





गोस्वामी तुलसीदास जी रचित श्रीरामचरितमानस (बालकाण्ड) से भगवान श्री राम के प्रकट होने का पावन प्रसंग — "भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी"। यह स्तुति प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव के आनंद को समर्पित है। गीत के बोल (Lyrics): भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै माता पुनि बोली सो मति डोली तजहु तात यह रूपा कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी... #ShriRam #BhayePragatKripala #RamJanmotsav #RamBhajan #Ramcharitmanas #DevotionalSong #RamNavami #AwadhiBhajan #श्रीराम #रामजन्मोत्सव #रामनवमी #ramnavami #रामभजन #रामचरितमानस #बालकांड #बालकाण्ड #balkand #छंद38.191

गुरुवार, 17 सितंबर 2026

Ramcharitmanas Stuti Song - Balkand 35.185

श्री राम चरित मानस बाल कांड 35.185  

श्री रामचरितमानस में अनेक स्तुतियाँ हैं। यह स्तुति बालकांड में आती है। 

श्री शिव जी यह कथा माता पार्वती को सुना रहे हैं। वे कहते हैं कि श्री राम अवतार से पूर्व धरती माता पापियों के पापों का बोझ न उठा पाने की बात लेकर, गौ रूप धारण कर देवताओं और संतों के पास गईं । वे सब मिलकर ब्रह्मा जी के गए। शिव जी गिरिजा जी से कहते हैं कि उस चर्चा में मैं भी था और मैंने ब्रह्मा जी से कहा कि श्री नारायण सब भक्तों की प्रार्थना सुन कर उन्हें तारते हैं। 

यह सुन ब्रह्मा जी भक्ति भाव में लीं हुए और उन्होंने नारायण स्तुति गाई जिसके बाद श्री विष्णु ने राम अवतार की रूप में आने का आश्वासन दिया । 

यह विडिओ यूट्यूब पर हैं और मानस जी के दोहों और छंदों को ही एक गीत के रूप मेँ ढाला गया है । आशा है आप लोगों को पसंद आएगा । 

 
The sacred Hari Stuti (जय जय सुरनायक जन सुखदायक) from Goswami Tulsidas Ji's Sri Ramcharitmanas (Bala Kanda, Doha 185 and Chhands 1–4). 🌸 STORY CONTEXT: Lord Shiva explains to Goddess Parvati how Lord Brahma rejoiced upon hearing that Lord Vishnu is omnipresent and revealed through pure love. Overflowing with devotion and tears of joy, Lord Brahma raises his hands in prayer to praise Lord Narayan on behalf of all Devas, Sages, and Mother Earth. सुनि बिरन्चि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर। अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर ॥ जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवन्ता। गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिन्धुसुता प्रिय कन्ता॥ पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरमु न जानइ कोई। जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई ॥ जय जय अबिनासी सब घट बासी व्यापक परमानन्दा। अबिगत गोतीतम् चरित पुनीतम् मायारहित मुकुन्दा॥ जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृन्दा। निसि बासर ध्यावहिं गुनगन गावहिं जयति सच्चिदानन्दा ॥ जेहिं सिरिष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाइ न दूजा। सोइ करउ अघारी चिन्त हमारी जानिय भगति न पूजा॥ जो भव भय भन्जन मुनि मन रन्जन गन्जन बिपति बरूथा। मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा ॥ सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहिं जाना। जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना॥ भव बारिधि मन्दर सब बिधि सुन्दर गुनमन्दिर सुखपुन्जा। मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कन्जा ॥

शनिवार, 28 मार्च 2026

ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौंतीस (34) समापन अंक

 

 ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौंतीस (34)

समापन अंक 



भाग 34

प्रियंका


उस शाम, मैंने ऐसे पार्टी वाले कपड़े पहने जो मैंने काफी समय से नहीं पहने थे, और जिन्हें मैं द्वीप पर नहीं ले गई थी। वहाँ ऐसी कोई जरूरत भी नहीं थी।

मैंने लैवेंडर शिफॉन की ड्रेस पहनी जो मुझे पता था कि मुझ पर अच्छी लगेगी। मैंने कुछ गहने भी पहने जो अंशुमन ने मेरे लिए पहले खरीदे थे। मैंने सोचा था कि मैं जाकर अपने बाल ठीक करवा लूं जैसा कि मैं आमतौर पर ऐसी पार्टियों के लिए करती थी, लेकिन मैंने ऐसा न करने का फैसला किया। मेरे बाल मुझे अंशुमन की अच्छी पत्नी या साथी नहीं बनाते थे। इसलिए, मैंने अपने बालों को अपने कंधों का आसपास खुला छोड़ दिया और उन्हें चमक देने का लिए खूब ब्रश किया। "तुम एक दर्शनीय दृश्य हो बेबी" वह बुदबुदाया।

"चूमना नहीं," मैंने नखरे से कहा, "मेरी लिपस्टिक..."

"लिपस्टिक को भाड़ में भेजो पत्नी-श्री.... ।" उसने मुझे गहराई से चूमा और मेरी लिपस्टिक को पूरा फैला दिया, जैसा कि हम दोनों जानते थे कि वह ऐसा ही करेगा। उसने अपनी करतूत को देखने का लिए मुझे कंधों से थाम कर कुछ दूर किया। "मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, बेब।" मुझे लगा कि मेरे अंदर से गर्मी निकल रही है और मैं उत्तेजित हो रही हूँ। दो दशक बाद भी मेरे पति में यह क्षमता थी।

"अगर तुम चाहो तो हम अभी .... " मैं शैतानी से मुस्कराई। लेकिन उसने मुझे थाम लिया।

"समय नहीं है।"

"खेल बिगाड़ू खिलाड़ी।" मैंने हँसते हुए अपना बैग उठाया और कुछ टिश्यू लिए ताकि मैं अपना चेहरा ठीक कर सकूं, क्योंकि अंशुमन ने मेरी लिपस्टिक को बहुत खराब कर दिया था।

जब हम होटल पहुँचे और बॉल रूम में जाने ही वाले थे, मैंने अंशुमन की बाँह पकड़ ली। "तुम मुझे सारी रात अकेली नहीं छोड़ोगे, है न?" पुराने डर अभी भी थे, और पार्टी के दबाव मेँ, वे सामने आ गए। अंशुमन के लिए भी यही था, उसे चिंता थी कि अगर उसने अनजाने में कोई गलती की तो मैं उसे छोड़ दूंगी। लेकिन हम अब अपने डर पर खुल कर बातें करते थे।

"केवल बाथरूम जाने के लिए, बेब।" वह मुस्कराते हुए बोला।

मैंने मुंह बनाया। "तुम कोमल भावनाओं को बढ़िया व्यक्त करते हो जी!"

"मैं जानता हूं जी। यह एक कौशल है।" वह शरारत से मुस्कराया, और इस बात ने मुझे सहज कर दिया। उसने मेरी ज़रूरतों या मेरी इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं किया, लेकिन उसने इसे कोई बड़ी बात भी नहीं बनाया; बस इतना कहा कि वह मेरे लिए हमेशा मौजूद रहेगा और आगे बढ़ गया। हम पुराने जीवन मेँ वापस नहीं जा रहे थे, हम आगे बढ़ रहे थे।

यह एक शानदार पार्टी थी और हम दोनों ने पहले से कहीं अधिक आनंद उठाया। फिर अंशुमन मंच पर गया। वहाँ उसे सीईओ और अध्यक्ष पद से स्थायी रूप से हटने की घोषणा करनी थी। "आज रात यहाँ आने का लिए आप सभी का धन्यवाद।" वह बहुत आकर्षक था, और अपने पति को कमरे पर नियंत्रण करते देख मुझे रोमांच महसूस हुआ।

दुर्भाग्य-वश, तभी काव्या ने मुझे ढूंढ कर मुझसे बातें करने का निर्णय लिया। वह अभी भी कंपनी में थी, हालांकि अब वह अंशुमन की असिस्टेन्ट नहीं थी। "नमस्ते, प्रियंका जी।"

मैंने उसे एक सतही मुस्कान दी और जवाब में सिर हिलाया, फिर अपना ध्यान वापस अपने पति की ओर लगाया। अंशुमन की आंखें चिंता से चमक उठी थी, लेकिन मैंने अपना सिर हिलाया और उसे चुपचाप दूर से ही आँखों से उसे समझाया कि वह चिंता न करे। मुझे अब तुम्हारे सहारे का भरोसा मिल गया है, मेरे प्यारे अंशुमन।

"जब मैं मौज-मस्ती करता रहा हूँ, उस दौरान प्रभाकर ने शानदार काम किया है," अंशुमन ने कहा, उसकी नज़रें मुझसे हटकर अपने उत्तराधिकारी पर चली गईं। "यहाँ आओ, प्रभाकर।"

जैसे ही प्रभाकर मंच पर चढ़ा, काव्या ने कहा, "मैं आप दोनों को एक साथ देखकर आश्चर्यचकित हूं।"

मैंने काव्या की उपेक्षा करते हुए अंशुमन की बात पर ताली बजाई।

"प्रियंका जी, मैं----"

"शशशश, काव्या, अंशुमन बोल रहे हैं। बाद मेँ बात करें?" मैंने दृढ़ता से कहा।

भगवान, लेकिन वह नासमझ थी, मैंने सोचा। बहुत दर्दनाक। वह जवान लड़की थी, भ्रमित थी, और अपने बॉस का प्रति आसक्त थी। उसका शादीशुदा बॉस। मुझे उसके लिए बुरा लगा। मुझे लगा था कि मेरे जाने का बाद अंशुमन का साथ उसके उस व्यवहार के लिए मुझे गुस्सा या नाराजगी महसूस होगी, लेकिन सिर्फ दया आई। वह उम्र बढ़ने पर समझदार हो जाएगी, और मुझे उम्मीद थी कि वह इस समय को बिना ज्यादा झिझक के याद कर सकेगी।

"मैं जानता हूँ कि मैंने कहा था कि मैं गर्मियों में वापस आऊंगा, लेकिन मैंने सीईओ और अध्यक्ष पद से हटने का फैसला किया है।" सभा में हैरानी भरी कानाफूसी चल पड़ी। "जैसा कि आप में से कुछ लोग जानते हैं, मेरी पत्नी लक्षद्वीप में एक रिसॉर्ट चलाती है, और हम अब वहीं रह रहे हैं, हालांकि हम अभी भी यहाँ अपने घर से आते-जाते रहेंगे। मैं राव-सिन्हा-आर्किटेक्ट्स-एण्ड-बिल्डर्स के बोर्ड में काम करना जारी रखूंगा और उन परियोजनाओं पर काम करूंगा जिनमें प्रभाकर मुझे शामिल करने का फैसला करेंगे" अंशुमन ने प्रभाकर की ओर मुस्कराते हुए कहा "लेकिन अब इस कंपनी की बागडोर और आप सब की भलाई को किसी और को सौंपने का समय आ गया है। मैं प्रभाकर को अपना मित्र और असाधारण सहकर्मी मानता हूँ।" सभी ने तालियाँ बजाईं। मैं भी उनमें शामिल हो गई।

"आप उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर रही हैं। वह कंपनी का साथ बहुत बढ़िया काम करने वाले थे, कंपनी को और ऊंचा ले जाने वाले थे," काव्या आक्रोश मेँ फुसफुसाई, "और आप----"

"शश, काव्या," मैंने इस बार कड़े लहजे मेँ कहा। "अंशुमन अभी भी बोल रहे हैं न?” मैंने उससे कभी इस रुखाई से बात नहीं की थी। लेकिन मैं एक नई महिला बन चुकी थी।

"प्रियंका, डार्लिंग, यहाँ आओ, बेब," मैंने अंशुमन को कहते सुना।

मैं स्टेज पर गई और उस ने मेरा हाथ थाम लिया और मुझे धीरे से माइक्रोफोन की ओर ले गया। उसे पता था कि मुझे ध्यान का केंद्र बनना पसंद नहीं है, लेकिन उसने पहले ही मुझसे इस बारे में बात की थी। उसने कहा, "मैं सबसे शेयर करना चाहता हूँ कि हमारी शादी के बीस साल पूरे हो चुके हैं। मेरी पत्नी प्रियंका और मैं बीस साल से शादीशुदा हैं।"

पूरे कमरे में बधाई की तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं।

"वह सबसे खूबसूरत इंसान है जिसे मैं जानता हूं।" उसने मुझे नहीं बताया था कि वह मेरे बारे में बात करेगा। मुझे लगा था कि वह हमारे रिसॉर्ट के बारे में ही कुछ कहेगा। "प्रियंका सर्वश्रेष्ठ पत्नी है जो इस दुनिया का कोई भी आदमी पा सकता हो। वह सबसे अच्छी माँ है जिसका कोई भी बच्चे सपने देख सकते हों। मैं उसके साथ एक नई यात्रा शुरू करने के लिए रोमांचित हूँ।" फिर उसने मुझे चूम लिया, जिस पर कमरे में तालियाँ गूंज उठीं। मैं शरमा गई। "राव-सिन्हा-आर्किटेक्ट्स-एण्ड-बिल्डर्स को आज की आधुनिक कंपनी बनाने में मदद करने का लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं अभी कुछ दिन यहाँ रहूँगा, और मुझे उम्मीद है कि जब भी मैं कार्यालय में आऊँगा, आप सभी से मिलूँगा।"

उसने मुझे बांहों में भर लिया और फुसफुसाया, “घर जाने का समय हो गया है डार्लिंग।” मैं कान से कान तक मुस्करा रही थी। जब प्रभाकर ने माइक्रोफोन संभाला तो अंशुमन मुझे लेकर मंच से उतर आया।

प्रभाकर ने अंशुमन को इस निर्णय और नेतृत्व की घोषणा का लिए धन्यवाद दिया, और पूरा कमरा फिर एक बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जैसा कि योजना थी, जैसे ही प्रभाकर ने राव-सिन्हा आर्किटेक्चर कंपनी के लिए अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करना शुरू किया, अंशुमन और मैं चुपचाप बॉल रूम से बाहर निकल गए। अब समय आ गया था कि कंपनी नए नेतृत्व के तहत आगे बढ़े।

"मैं घर पहुँचने का इंतजार नहीं कर सकता" अंशुमन ने मुझे तिरछी नजर से देखते हुए पार्किंग की ओर जाते हुए अपने होंठ मेरे कान पर रगड़े।

मैंने उसकी ओर देखकर मुस्कराई। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ, मेरे प्यारे अंशुमन।"

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मेरी प्यारी प्रियंका।"

और हम अपनी नई शुरुआत की तरफ चल पड़े।

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अस्वीकरण/ Disclaimer

यह एक पूरी तरह काल्पनिक कहानी है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, या परिवार से कोई संबंध नहीं है। 

This is a work of fiction. It is not relevant to any person(s), or families