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शनिवार, 28 मार्च 2026

ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौंतीस (34) समापन अंक

 

 ज़िंदगी अधूरी तेरे बिन - भाग चौंतीस (34)

समापन अंक 



भाग 34

प्रियंका


उस शाम, मैंने ऐसे पार्टी वाले कपड़े पहने जो मैंने काफी समय से नहीं पहने थे, और जिन्हें मैं द्वीप पर नहीं ले गई थी। वहाँ ऐसी कोई जरूरत भी नहीं थी।

मैंने लैवेंडर शिफॉन की ड्रेस पहनी जो मुझे पता था कि मुझ पर अच्छी लगेगी। मैंने कुछ गहने भी पहने जो अंशुमन ने मेरे लिए पहले खरीदे थे। मैंने सोचा था कि मैं जाकर अपने बाल ठीक करवा लूं जैसा कि मैं आमतौर पर ऐसी पार्टियों के लिए करती थी, लेकिन मैंने ऐसा न करने का फैसला किया। मेरे बाल मुझे अंशुमन की अच्छी पत्नी या साथी नहीं बनाते थे। इसलिए, मैंने अपने बालों को अपने कंधों का आसपास खुला छोड़ दिया और उन्हें चमक देने का लिए खूब ब्रश किया। "तुम एक दर्शनीय दृश्य हो बेबी" वह बुदबुदाया।

"चूमना नहीं," मैंने नखरे से कहा, "मेरी लिपस्टिक..."

"लिपस्टिक को भाड़ में भेजो पत्नी-श्री.... ।" उसने मुझे गहराई से चूमा और मेरी लिपस्टिक को पूरा फैला दिया, जैसा कि हम दोनों जानते थे कि वह ऐसा ही करेगा। उसने अपनी करतूत को देखने का लिए मुझे कंधों से थाम कर कुछ दूर किया। "मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, बेब।" मुझे लगा कि मेरे अंदर से गर्मी निकल रही है और मैं उत्तेजित हो रही हूँ। दो दशक बाद भी मेरे पति में यह क्षमता थी।

"अगर तुम चाहो तो हम अभी .... " मैं शैतानी से मुस्कराई। लेकिन उसने मुझे थाम लिया।

"समय नहीं है।"

"खेल बिगाड़ू खिलाड़ी।" मैंने हँसते हुए अपना बैग उठाया और कुछ टिश्यू लिए ताकि मैं अपना चेहरा ठीक कर सकूं, क्योंकि अंशुमन ने मेरी लिपस्टिक को बहुत खराब कर दिया था।

जब हम होटल पहुँचे और बॉल रूम में जाने ही वाले थे, मैंने अंशुमन की बाँह पकड़ ली। "तुम मुझे सारी रात अकेली नहीं छोड़ोगे, है न?" पुराने डर अभी भी थे, और पार्टी के दबाव मेँ, वे सामने आ गए। अंशुमन के लिए भी यही था, उसे चिंता थी कि अगर उसने अनजाने में कोई गलती की तो मैं उसे छोड़ दूंगी। लेकिन हम अब अपने डर पर खुल कर बातें करते थे।

"केवल बाथरूम जाने के लिए, बेब।" वह मुस्कराते हुए बोला।

मैंने मुंह बनाया। "तुम कोमल भावनाओं को बढ़िया व्यक्त करते हो जी!"

"मैं जानता हूं जी। यह एक कौशल है।" वह शरारत से मुस्कराया, और इस बात ने मुझे सहज कर दिया। उसने मेरी ज़रूरतों या मेरी इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं किया, लेकिन उसने इसे कोई बड़ी बात भी नहीं बनाया; बस इतना कहा कि वह मेरे लिए हमेशा मौजूद रहेगा और आगे बढ़ गया। हम पुराने जीवन मेँ वापस नहीं जा रहे थे, हम आगे बढ़ रहे थे।

यह एक शानदार पार्टी थी और हम दोनों ने पहले से कहीं अधिक आनंद उठाया। फिर अंशुमन मंच पर गया। वहाँ उसे सीईओ और अध्यक्ष पद से स्थायी रूप से हटने की घोषणा करनी थी। "आज रात यहाँ आने का लिए आप सभी का धन्यवाद।" वह बहुत आकर्षक था, और अपने पति को कमरे पर नियंत्रण करते देख मुझे रोमांच महसूस हुआ।

दुर्भाग्य-वश, तभी काव्या ने मुझे ढूंढ कर मुझसे बातें करने का निर्णय लिया। वह अभी भी कंपनी में थी, हालांकि अब वह अंशुमन की असिस्टेन्ट नहीं थी। "नमस्ते, प्रियंका जी।"

मैंने उसे एक सतही मुस्कान दी और जवाब में सिर हिलाया, फिर अपना ध्यान वापस अपने पति की ओर लगाया। अंशुमन की आंखें चिंता से चमक उठी थी, लेकिन मैंने अपना सिर हिलाया और उसे चुपचाप दूर से ही आँखों से उसे समझाया कि वह चिंता न करे। मुझे अब तुम्हारे सहारे का भरोसा मिल गया है, मेरे प्यारे अंशुमन।

"जब मैं मौज-मस्ती करता रहा हूँ, उस दौरान प्रभाकर ने शानदार काम किया है," अंशुमन ने कहा, उसकी नज़रें मुझसे हटकर अपने उत्तराधिकारी पर चली गईं। "यहाँ आओ, प्रभाकर।"

जैसे ही प्रभाकर मंच पर चढ़ा, काव्या ने कहा, "मैं आप दोनों को एक साथ देखकर आश्चर्यचकित हूं।"

मैंने काव्या की उपेक्षा करते हुए अंशुमन की बात पर ताली बजाई।

"प्रियंका जी, मैं----"

"शशशश, काव्या, अंशुमन बोल रहे हैं। बाद मेँ बात करें?" मैंने दृढ़ता से कहा।

भगवान, लेकिन वह नासमझ थी, मैंने सोचा। बहुत दर्दनाक। वह जवान लड़की थी, भ्रमित थी, और अपने बॉस का प्रति आसक्त थी। उसका शादीशुदा बॉस। मुझे उसके लिए बुरा लगा। मुझे लगा था कि मेरे जाने का बाद अंशुमन का साथ उसके उस व्यवहार के लिए मुझे गुस्सा या नाराजगी महसूस होगी, लेकिन सिर्फ दया आई। वह उम्र बढ़ने पर समझदार हो जाएगी, और मुझे उम्मीद थी कि वह इस समय को बिना ज्यादा झिझक के याद कर सकेगी।

"मैं जानता हूँ कि मैंने कहा था कि मैं गर्मियों में वापस आऊंगा, लेकिन मैंने सीईओ और अध्यक्ष पद से हटने का फैसला किया है।" सभा में हैरानी भरी कानाफूसी चल पड़ी। "जैसा कि आप में से कुछ लोग जानते हैं, मेरी पत्नी लक्षद्वीप में एक रिसॉर्ट चलाती है, और हम अब वहीं रह रहे हैं, हालांकि हम अभी भी यहाँ अपने घर से आते-जाते रहेंगे। मैं राव-सिन्हा-आर्किटेक्ट्स-एण्ड-बिल्डर्स के बोर्ड में काम करना जारी रखूंगा और उन परियोजनाओं पर काम करूंगा जिनमें प्रभाकर मुझे शामिल करने का फैसला करेंगे" अंशुमन ने प्रभाकर की ओर मुस्कराते हुए कहा "लेकिन अब इस कंपनी की बागडोर और आप सब की भलाई को किसी और को सौंपने का समय आ गया है। मैं प्रभाकर को अपना मित्र और असाधारण सहकर्मी मानता हूँ।" सभी ने तालियाँ बजाईं। मैं भी उनमें शामिल हो गई।

"आप उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर रही हैं। वह कंपनी का साथ बहुत बढ़िया काम करने वाले थे, कंपनी को और ऊंचा ले जाने वाले थे," काव्या आक्रोश मेँ फुसफुसाई, "और आप----"

"शश, काव्या," मैंने इस बार कड़े लहजे मेँ कहा। "अंशुमन अभी भी बोल रहे हैं न?” मैंने उससे कभी इस रुखाई से बात नहीं की थी। लेकिन मैं एक नई महिला बन चुकी थी।

"प्रियंका, डार्लिंग, यहाँ आओ, बेब," मैंने अंशुमन को कहते सुना।

मैं स्टेज पर गई और उस ने मेरा हाथ थाम लिया और मुझे धीरे से माइक्रोफोन की ओर ले गया। उसे पता था कि मुझे ध्यान का केंद्र बनना पसंद नहीं है, लेकिन उसने पहले ही मुझसे इस बारे में बात की थी। उसने कहा, "मैं सबसे शेयर करना चाहता हूँ कि हमारी शादी के बीस साल पूरे हो चुके हैं। मेरी पत्नी प्रियंका और मैं बीस साल से शादीशुदा हैं।"

पूरे कमरे में बधाई की तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं।

"वह सबसे खूबसूरत इंसान है जिसे मैं जानता हूं।" उसने मुझे नहीं बताया था कि वह मेरे बारे में बात करेगा। मुझे लगा था कि वह हमारे रिसॉर्ट के बारे में ही कुछ कहेगा। "प्रियंका वह पत्नी है जो इस दुनिया का कोई भी आदमी पा सकता हो, वह अच्छी माँ है जिसका कोई भी बच्चे सपने देख सकते हों। मैं उसके साथ एक नई यात्रा शुरू करने के लिए रोमांचित हूँ।" फिर उसने मुझे चूम लिया, जिस पर कमरे में तालियाँ गूंज उठीं। मैं शरमा गई। "राव-सिन्हा-आर्किटेक्ट्स-एण्ड-बिल्डर्स को आज की आधुनिक कंपनी बनाने में मदद करने का लिए आप सभी का धन्यवाद। मैं अभी कुछ दिन यहाँ रहूँगा, और मुझे उम्मीद है कि जब भी मैं कार्यालय में आऊँगा, आप सभी से मिलूँगा।"

उसने मुझे बांहों में भर लिया और फुसफुसाया, “घर जाने का समय हो गया है डार्लिंग।” मैं कान से कान तक मुस्करा रही थी। जब प्रभाकर ने माइक्रोफोन संभाला तो अंशुमन मुझे लेकर मंच से उतर आया।

प्रभाकर ने अंशुमन को इस निर्णय और नेतृत्व की घोषणा का लिए धन्यवाद दिया, और पूरा कमरा फिर एक बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जैसा कि योजना थी, जैसे ही प्रभाकर ने राव-सिन्हा आर्किटेक्चर कंपनी के लिए अपने दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करना शुरू किया, अंशुमन और मैं चुपचाप बॉल रूम से बाहर निकल गए। अब समय आ गया था कि कंपनी नए नेतृत्व के तहत आगे बढ़े।

"मैं घर पहुँचने का इंतजार नहीं कर सकता" अंशुमन ने मुझे तिरछी नजर से देखते हुए पार्किंग की ओर जाते हुए अपने होंठ मेरे कान पर रगड़े।

मैंने उसकी ओर देखकर मुस्कराई। "मैं तुमसे प्यार करती हूँ, मेरे प्यारे अंशुमन।"

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मेरी प्यारी प्रियंका।"

और हम अपनी नई शुरुआत की तरफ चल पड़े।

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अस्वीकरण/ Disclaimer

यह एक पूरी तरह काल्पनिक कहानी है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, या परिवार से कोई संबंध नहीं है। 

This is a work of fiction. It is not relevant to any person(s), or families




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